मिस्ट्री शॉपिंग नाम पढ़ते हुए जैसे ही ‘मिस्ट्री’ शब्द पर नज़र पड़ती होगी ,मन में यह धारणा तो बनती ही होगी कि न जाने इस विषय में ऐसा क्या घुमावदार है जिसके रहते इसके नाम में ‘मिस्ट्री’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है, और साथ ही इसी ‘मिस्ट्री’ शब्द के कारण जिज्ञासा भी उत्पन्न होती होगी इस विषय के बारे में जानने की।

परंतु आपको यह बता दें कि जिज्ञासातुर करने वाला यह विषय , घुमावदार होने की धारणा के विपरीत बहुत ही सीधा और सरल है।

आज हम इसी विषय की सरलता और अद्भुत्ता पर प्रकाश डालेंगे। तो आइये जानते हैं व्यापार जगत से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में जिसका नाम है “मिस्ट्री शॉपिंग”

क्या है ‘मिस्ट्री शॉपिंग’?

‘मिस्ट्री शॉपिंग’ एक ऐसी तकनीक है जो अपने आप में किसी भी व्यवसाय की उन्नति के लिए ढेरों संभावनाएँ समेटे हुए है।

किसी भी कंपनी या व्यावसायिक संस्थान के व्यापार जगत में सफलता की सीढ़ी चढ़ने में सबसे बड़ा योगदान उसके ग्राहकों का होता है, आख़िर ग्राहक ही तो उस कंपनी द्वारा प्रदान की जाने वाली वस्तुओं , सेवाओं का उपयोग करते हैं जिससे कंपनी को मुनाफ़ा होता है।

ग्राहकों के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाये रखने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कंपनी अपने कुछ सिद्धांत बनाये जिनका हर कर्मचारी पालन करे ,जिसके बल पर वह कंपनी अपने ग्राहकों के मन में एक ऐसी छवि बना सके कि ग्राहक कंपनी की सेवाओं से पूर्ण रूप से संतुष्ट हों और सालों साल उन सेवाओं का उपयोग करते रहें, जिससे कंपनी को अधिक से अधिक मुनाफ़ा प्राप्त हो सके।

जैसे :

* ग्राहकों के साथ विनम्र तरीके से पेश आना।
* कार्यस्थल की साफ़-सफ़ाई का भरपूर ध्यान रखना ।
* परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए , ग्राहकों को समझना और उनके साथ डील करना।
* ग्राहकों को यह अनुभव कराना कि कंपनी उन्हें और उनकी ज़रूरतों को समझती है।
* ग्राहकों की हर संभव मदद करना और उन्हें कंपनी द्वारा प्रदान की जाने वाली वस्तु के बारे में पूर्ण रुचि के साथ सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करना।
* ग्राहकों से उम्दा तरीके से बातचीत करना तथा उन सभी मूल्यों का प्रदर्शन करना जिन्हें कंपनी अपनी स्थापना के स्तम्भ मानती है।

ये सब सिद्धांत कंपनी अपने कर्मचारियों को बताती है तथा ट्रेनिंग देकर उन्हें इन सिद्धांतों का पालन करना भी सिखाती है।
परंतु अब एक सवाल…..

“ क्या ये सिद्धांत बना लेना, कर्मचारियों को इनका पालन करने की हिदायत देना ,यही काफ़ी है?”

सोचिये ज़रा!

क्या ये ज़रूरी नहीं है कि समय-समय पर इसकी जाँच की जाये कि क्या सभी कर्मचारी उन सिद्धांतों का पालन कर भी रहे हैं या नहीं?

ज़रा सोच विचार करते ही आप ये समझ जाएँगे कि यह जाँच अत्यंत ज़रूरी है।

जैसा कि कहा भी जाता है कि “ ज़रूरत ही किसी वस्तु के निर्माण की जननि है” ,उसी प्रकार इस जाँच की ज़रूरत ने ही ‘मिस्ट्री शॉपिंग’के कॉन्सेप्ट को जन्म दिया है।

अब हमने ‘मिस्ट्री शॉपिंग’ के अस्तित्व में आने के बारे में तो जान लिया ,अब इस कॉन्सेप्ट के बारे में थोड़ा और गहराई में जानते हैं।

‘मिस्ट्री शॉपिंग’ का इस्तेमाल करके व्यावसायिक संस्थान ग्राहकों के उनकी कंपनी के साथ अनुभव को स्वयं महसूस करके , उस अनुभव में जो खामियाँ हैं उन्हें ढूँढकर ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।

इसके लिए कंपनी के अधिकारी ‘मिस्ट्री शॉपिंग’ एजेंसी से संपर्क करते हैं और एजेंसी उन्हें एक ‘मिस्ट्री शॉपर’ प्रदान करती है जो कंपनी में एक ग्राहक बनकर ही जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो ‘मिस्ट्री शॉपिंग’ में कंपनी के अधिकारी अपनी कंपनी के वातावरण तथा कर्मचारियों के ग्राहकों के प्रति रवैये तथा बातचीत के तरीके को जाँचने के लिए एक जाँच अधिकारी को नकली ग्राहक बनाकर भेजते हैं।

उस नकली ग्रहक को ‘मिस्ट्री शॉपर’ कहा जाता है।

कंपनी द्वारा एजेंसी को सब बता दिया जाता है कि वह किन वस्तुओं और सेवाओं में डील करती है , साथ ही यह भी कि ‘मिस्ट्री शॉपर’ को ख़ास तौर पर किन-किन बातों पर ध्यान देना है।

जैसे:
* यदि ग्राहकों को कोई समस्या है तो क्या कर्मचारी खुले दिल से सहायता करते हैं?
* क्या कर्मचारियों का बर्ताव विनम्रतापूर्ण था?
* क्या कर्मचारी एक बेहतरीन तरीके से कंपनी द्वारा बेचे जाने वाली वस्तु या सेवा के बारे में ग्राहकों को बता पाने में सक्षम हैं?
* क्या कंपनी की स्वच्छता आदि पर्याप्त है या उसमें कोई कमी है?

इस सब जानकारी को प्राप्त कर ‘मिस्ट्री शॉपर’ निर्धारित जगह पर मूल्यांकन करने के लिए पहुँच जाता है।

ग्राहक बनकर ये मिस्ट्री शॉपर उस जगह पर मौजूद कंपनी के कर्मचारियों की हर बात पर बारीक़ नज़र रखते हैं, ख़ास कर उन बातों पर जिनपर कंपनी द्वारा विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया हो।

उस जगह से इकट्ठी की सारी जानकारी ‘मिस्ट्री शॉपर’ मिस्ट्री शॉपिंग एजेंसी को प्रदान करते हैं, जिसे मिस्ट्री शॉपिंग एजेंसी अच्छे से आँक कर कंपनी को प्रदान करती है और उन्हें उन खामियों से रूबरू कराती है, जिनपर काम करके कंपनी अपनी छवि को और बेहतर बना सकती है।

सैमसंग,एक्सिस बैंक आदि ‘मिस्ट्री शॉपिंग’ पर भरोसा करके उसका इस्तेमाल करने वाले कुछ प्रमुख नाम हैं।

चाहे व्यापार छोटे स्तर पर हो या बड़े स्तर पर ‘मिस्ट्री शॉपिंग’ दोनों के लिए लाभदायक है।

कई कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को ऐसे संकेत भी प्रदान कर देती हैं कि उन्होंने एक मिस्ट्री शॉपर को तैनात किया है, जो कि एक माह के अंतराल में या किसी भी समय जाँच के लिए पहुँच सकता है, परंतु ऐसी भी कंपनियाँ हैं जो इस बात को अपने कर्मचारियों से गोपनीय रखती हैं।

कर्मचारियों को संकेत देना या न देना, ये पूर्णतः कंपनी पर निर्भर करता है।

बता देने का लाभ यह है कि कर्मचारी हर पल सतर्क रहेंगे और अपने कर्तव्य का पूरी तरह पालन करेंगे।

हर आम ग्राहक में भी वो मिस्ट्री शॉपर को देखेंगे तथा उत्तम व्यवहार का प्रदर्शन करेंगे।

हर दिन कार्यस्थल की सफ़ाई आदि का अच्छे से ध्यान रखेंगे कि कहीं मिस्ट्री शॉपर का आना आज तो तय नहीं?

तो इस तरह मिस्ट्री शॉपिंग के तहत जहाँ कंपनी के प्रदर्शन की जाँच हो जाती है वहीं यदि कर्मचारियों को आभास हो कि मिस्ट्री शॉपर कभी भी आ सकता है तो वे अत्यंत सतर्कता से अपना कार्य करेंगे।

अब हम मिस्ट्री शॉपिंग के बारे में तो जान गए हैं, परंतु ऐसी कुछ मिथक धारणाएँ भी इसके साथ जुड़ी हैं जो इसकी एक बुरी छवि भी प्रस्तुत करती हैं, अब हम उन्हीं मिथक धारणाओं की धुंध को छाँटने का प्रयत्न करेंगे ताकि ‘मिस्ट्री शॉपिंग’ को और बेहतर जान पाएँ।

1. कई बार यह धारणा बना ली जाती है कि मिस्ट्री शॉपिंग कंपनी केंद्रित है,जिसके तहत यदि कोई कर्मचारी कंपनी के मूल्यों से हल्का सा भी चूक जाये,तो उसे नौकरी से निकल दिया जाता है।

परंतु सच कहें तो ‘मिस्ट्री शॉपिंग’ का मक़्सद यह जानना है कि कंपनी जिन मूल्यों पर आधारित होने का दावा करती है,क्या वास्तव में उन मूल्यों का प्रदर्शन भी करती है या नहीं?

अगर कोई कर्मचारी ज़रा सा चूक भी जाए तो यह ज़रूरी नहीं कि ये उसी की गलती हो, यह भी तो हो सकता है कि कंपनी द्वारा उसे जो ट्रेनिंग प्रदान की गयी,उसी में कुछ कमी रह गयी हो।

कंपनी को भी इस बात को स्वीकार करना चाहिए और अक़्सर कंपनियाँ इसे स्वीकार करती भी हैं।

कर्मचारियों पर अंगुली उठाने से पहले, कंपनी के अधिकारी कंपनी द्वारा प्रदान की जाने वाली ट्रेनिंग में बेहतरी लाने की ओर ध्यान देते हैं ।

यदि हर कंपनी इसी बात पर ध्यान दे तो मिस्ट्री शॉपिंग ,कंपनी और कर्मचारी दोनों के लिए वरदान साबित होगी।

2. अन्य मिथक धारणा यह है कि कर्मचारी मिस्ट्री शॉपिंग को बिल्कुल पसंद नहीं करते।

उन्हें यह लगता है कि उनकी जासूसी की जा रही है।

परंतु ऐसा उन्हें तब ही महसूस हो सकता है यदि कंपनी ‘मिस्ट्री शॉपिंग’ का इस्तेमाल गलत तरीके से करे यानि वह अपने कर्मचारियों में ही सारी खामियाँ देखे और उन्हें नौकरी से निकल दे।

परंतु यदि ग़ौर फरमाएँ तो मिस्ट्री शॉपिंग कर्मचारियों को आँकने के लिए नहीं बल्कि कंपनी का बतौर समूह प्रदर्शन आँकने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

यदि कंपनी के अधिकारी कर्मचारियों को ‘मिस्ट्री शॉपिंग’ के मायने अच्छे से समझाएँ तो कर्मचारी भी उनका समर्थन ही करेंगे।

3. ‘मिस्ट्री शॉपर’ एक कड़े रवैय्ये वाले कठोर ग्राहक की तरह पेश आते हैं।

यह भी एक मिथक धारणा ही है।

मिस्ट्री शॉपर यदि कड़ा रुख आज़माएंगे तो कर्मचारी उन्हें भाँप लेंगे इसलिए एक मिस्ट्री शॉपर को हिदायत दी जाती है कि वह आम ग्राहक की तरह ही बर्ताव करें।

तो यह मिथक धारणा भी यहाँ ध्वस्त हुई।

ये सब जानकर नतीजा यह निकलता है कि ‘मिस्ट्री शॉपिंग’ एक प्रभावी कॉन्सेप्ट है तथा यदि इसे जिस भावना से उपयोग करना चाहिये उसी भावना से उपयोग किया जाये, यानि पूरी कंपनी के हित के लिए ,न कि किसी कर्मचारी की खामियाँ खोजने के लिए तो कंपनी और कर्मचारी दोनों को फ़ायदा होगा और इस कॉन्सेप्ट में कोई नकारात्मकता नहीं दिखेगी।

अब हमने मिस्ट्री शॉपिंग के बारे में तो भरपूर
जान लिया,अब यह जान लेते हैं कि

‘मिस्ट्री शॉपर’ बनने के लिए क्या करना पड़ता है?

तो आइये जानें….

मिस्ट्री शॉपर बनना अमूमन एक पार्ट टाइम जॉब है जिसे आप अपने खाली समय में कर सकते हैं तथा धन भी कमा सकते हैं।

अक़्सर मिस्ट्री शॉपिंग एजेंसी ,मिस्ट्री शॉपर के साथ कॉन्ट्रेक्ट साइन करती हैं जिसके तहत मिस्ट्री शॉपर काम करते हैं।

एक मिस्ट्री शॉपर अपने हिसाब से निर्धारित समय सीमा में कभी भी जा के जिस जगह उसे जाँच करनी हो जाँच कर सकता है।

जैसे आम तौर पर दफ़्तरों में कर्मचारियों के आने, जाने का समय बंधा होता है, पर मिस्ट्री शॉपर को ऐसे किसी बंधन में नहीं बंधना पड़ता।

कह सकते हैं कि यह एक फ्लेक्सिबल या लचीली जॉब है।

चाहे जो भी हो, मिस्ट्री शॉपर को अपने कार्य में निपुणता , तजुरबा दोनों अच्छे से ग्रहण करने पड़ते हैं ताकि वह अच्छी धनराशि कमा सके।

सुनने में तो मिस्ट्री शॉपर का काम बहुत सरल प्रतीत होता है, परंतु जैसा कि कहा भी गया है, “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” वही हिसाब है यहाँ।

एक मिस्ट्री शॉपर ही भली-भाँति जानता है कि इस कार्य क्षेत्र में खुद को स्थापित करने के लिए कितनी मेहनत और योग्यता चाहिए।

जी, आपको अच्छा मिस्ट्री शॉपर बनने के लिए कई तरह की योग्यताएँ ग्रहण करनी होंगी , जैसे:

* अच्छी संवाद शैली : दुनिया में कहीं भी कोई भी काम करना हो, अच्छी संवाद शैली की ज़रूरत पड़ती ही है। मिस्ट्री शॉपर को भी अच्छे से बातचीत करने का तरीका आना चाहिए , तभी उसे मिस्ट्री शॉपिंग एजेंसी नौकरी देगी। प्रभावी वक्ता ही एजेंसी को आकर्षित कर पाते हैं।

* अच्छा लेखन लिखने की कला:अक़्सर मिस्ट्री शॉपर को उसका अनुभव उस कंपनी से जुड़ा जहाँ वह जाँच करने गया हो, लिखित रिपोर्ट के रूप में एजेंसी को प्रदान करना पड़ता है। यदि आप में अच्छा लेखन लिखने की कला , उम्दा संवाद शैली है तो बशर्ते आप अच्छे मिस्ट्री शॉपर बन सकते हैं पर सिर्फ़ लेखन ही नहीं, इसके साथ साथ आपको थोड़ा कंप्यूटर चलाने की जानकारी भी होनी चाहिए, ताकि आप रिपोर्ट की सॉफ़्ट कॉपी एजेंसी को भेज सकें। इन सब विशेषताओं के बल पर ही कोई व्यक्ति मिस्ट्री शॉपर बन सकता है।

* पारखी नज़रें जो अच्छा निरीक्षण कर सकें: एक मिस्ट्री शॉपर के पास ,कंपनी के वातावरण, कर्मचारियों के स्वभाव का अच्छे से निरीक्षण करने वाली पारखी नज़रें होनी चाहिए। इसके लिए मिस्ट्री शॉपर को पूरी रिसर्च करके ये ज्ञान अर्जित करना चाहिए कि एक उम्दा कंपनी की ग्राहक सेवा कैसी होनी चाहिए तथा कर्मचारियों में क्या क्या गुण होने चाहिए । तभी तो वह हर पहलू की कसौटी पर कंपनी और उसके कर्मचारियों को खड़ा कर जाँच कर सकेगा।

ये सब योग्यताएँ हैं जो किसी व्यक्ति को एक अच्छा मिस्ट्री शॉपर बनाती हैं।इन सब योग्यताओं को अर्जित करके निम्नलिखित प्रक्रिया के ज़रिये आप मिस्ट्री शॉपर बनने की ओर अग्रसर हो सकते हैं:

* सबसे पहले एक सूची तैयार करें, मिस्ट्री शॉपिंग एजेंसियों की,ये काम आप गूगल का इस्तेमाल करके बड़ी आसानी से कर सकते हैं।

अब अगला काम है , उस सूची में जो एजेंसियाँ हैं उन सब के बारे में जानकारी प्राप्त करना , ये जाँच करना कि कहीं वो कोई फ्रॉड एजेंसी तो नहीं, ये सब भी आप गूगल के मध्यम से कर सकते हैं।

* एक अच्छी एजेंसी ढूँढने के बाद वहाँ आवेदन करें।

आवेदन करने पर आपका चयन हो गया तो आपको एजेंसी के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करना होगा।

उस कॉन्ट्रैक्ट में आपके कार्य संबंधी जानकारी , आपकी आमदन अदि के बारे में ज़िक्र किया गया होगा इसे अच्छे से पढ़कर ही साइन करें।

* इसके बाद आप बतौर मिस्ट्री शॉपर अपना काम प्रारम्भ कर सकते हैं।